हमारी याददाश्त कैसे काम करती है

दिमाग तेज़ कैसे करें मेमोरी बढ़ाने के तरीके how to increase memory how to improve memory how to increase brain power

हम सब अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं. इस दौरान हम बहुत सारी खट्टी-मीठे अनुभवों के साथ-साथ अच्छी-बुरी यादों को भी संजोते हैं.

दरअसल हम इन यादों को जानबूझकर अपने दिमाग में नहीं रखते बल्कि खुद-ब-खुद हमारे दिमाग में बैठ जाती हैं.

जैसे क्या आपको याद है कि…

  • हाल ही में आपने कौन सी मूवी देखी.
  • पहली नज़र में आप किसको पसंद करने लगे थे.
  • किसी रेस्तरां में आपने कौन सी टेस्टी डिश खाया था.

अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आपको ढेर सारी चीजों (GK फैक्ट्स इत्यादि) को याद रखना पड़ता है. लिहाज़ा आपके लिए यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमारी याददाश्त (मैमोरी) कैसे काम करती है. आप अपनी याददाश्त(मैमोरी) के रहस्य के बारे में जितना जानेंगे, उतना ही इसे सुधार सकेंगे. यहाँ हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि हमारी याददाश्त(मैमोरी) कैसे काम करती है.

हमारा दिमाग एक बहुत जटिल अंग है और इसके अन्दर याददाश्त कैसे और किस प्रकार सुरक्षित की जाती है-अभी भी इस रहस्य को न्यूरो साइंटिस्ट (मस्तिस्क वैज्ञानिक) सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. फिर भी काफी हद तक हम अपने दिमाग के बारे में जानने में सफल हो चुके हैं.

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किसी चीज को याद रखने में हमारा दिमाग इन स्टेप्स से गुजरता है: इनकोडिंग, स्टोरेज, और रिट्रीवल

1. इनकोडिंग:

किसी चीज को याद रखने के लिये हमारा दिमाग सबसे पहले इनकोडिंग करता है.

हमारा मस्तिष्क अनगिनत न्यूरोन्स(तंत्रिका कोशिका) या ब्रेन सेल से बना होता है. ये न्यूरोन्स एक दूसरे से जुड़ कर एक जटिल नेटवर्क बनाते हैं.

जब हमें कोई जानकारी मिलती है या हम किसी चीज का अनुभव करते हैं तो ये जानकारी/अनुभव एक इलेक्ट्रिक एनर्जी के रूप में न्यूरोन्स के इस नेटवर्क में डाल दी जाती है. इस प्रक्रिया में, एक न्यूरोन से दूसरे न्यूरोन में संदेशों की आवाजाही सिनैप्स और न्यूरोट्रांसमीटर के जरिये होती है.

जब एक न्यूरोन, दुसरे न्यूरोन को इस जानकारी/अनुभव का सिग्नल बार-बार भेजता हैं तो इनके बीच स्थित सिनैप्स और मजबूत हो जाता है.

जैसे जैसे आप नई नई चीजें और अनुभव सीखते हैं वैसे-वैसे न्यूरोन के कनेक्शन में भी बदलाव आता जाता है.

अब सवाल उठता है कि हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में हम ढेरों जानकारियाँ / अनुभव दिमाग में आती हैं तो अब तक तो दिमाग में इनका जबरदस्त स्टोरेज हो जाना चाहिए.

अब बारी आती है हमारे मस्तिष्क में स्थित hippocampus और frontal cortex की, जो ये देखते हैं कि कौन सी चीज याद रखने के योग्य है और कौन सी नहीं. इस तरह काम की जानकारियों की छटनी की जाती है.

इनकोडिंग की प्रोसेस को अच्छी तरह से करने के लिए आपको याद रखने वाली चीजों पर ध्यान देना होगा.

2. स्टोरेज:

इनकोडिंग प्रोसेस के जरिये जब मैमोरी बना ली जाती है तो इसे अब स्टोर किया जाता है.

जब हम किसी चीज की जानकारी लेते हैं या अनुभव करते हैं तो सबसे पहले ये शार्ट टर्म मैमोरी में स्टोर की जाती है. यहाँ याददाश्त कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रहती है. यानी शार्ट टर्म मैमोरी में कम क्षमता होती है.

फिर महत्वपूर्ण जानकारियाँ धीरे धीरे लॉन्ग टर्म मैमोरी में भेजे जाते हैं.

जितनी ज्यादा (शार्ट टर्म मैमोरी में स्थित) जानकारी/अनुभव रिपीट होते हैं उतना ही जल्दी ये जानकारी/अनुभव लॉन्ग टर्म मैमोरी में जा कर स्टोर हो जाते हैं.

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3. रिट्रीवल:

जब आप किसी चीज को याद करने की कोशिश करते हैं, दरअसल आप मस्तिष्क द्वारा स्टोर की गई मैमोरी को रिट्रीव या फिर से सामने लाते हैं. इसे मैमोरी रीकॉल भी कहते हैं.

आप अगर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो एग्जाम के समय मैमोरी रीकॉल करना काफी महत्वपूर्ण है.

इस विडियो को देख कर इस पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं

इस तरह आप काफी हद तक समझ गए होंगे कि हमारी मैमोरी कैसे काम करती है.

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