रबी और खरीफ़ की फसलों के नाम

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ऋतुओं के आधार पर फसलें तीन प्रकार की होती है:

रबी की फसल:

रबी फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की जरुरत होती है। ये फसलें सामान्यतः अक्तूबर-नवम्बर के महिनों में बोई जाती हैं।

रबी फसलों के नाम याद करने की ये आसान ट्रिक है:

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रबी फसलें C4 श्रेणी में आती हैं. इस श्रेणी के पौधे की खासियत होती है कि इनमे जल उपयोग क्षमता (WEU) और  प्रकाश संश्लेषण (photo synthesis) दर दोनों ही कम होती है. इस प्रकार इन पौधों में दिन के प्रकाश में श्वसन(respiration) एवं प्रकाश संश्लेषण की क्रिया संपन्न होती है.

खरीफ की फसल

इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान एवं आर्द्रता(humidity) तथा पकते समय शुष्क वातावरण की जरुरत होती है. इसे उत्तर भात में जून-जुलाई में बोया जाता है.

खरीफ फसलों के नाम याद करने की ये आसान ट्रिक है:

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खरीफ की फसलें C3 श्रेणी में आती हैं. इस श्रेणी के पौधे की खासियत होती है कि इनमे जल उपयोग क्षमता (WEU) एवं प्रकाश संश्लेषण (photo synthesis) दर दोनों ही अधिक होती है. जबकि प्रकाश-श्वसन दर कम होती है.

ज़ायद की फ़सल

इस वर्ग की फसलों में तेज गर्मी और शुष्क हवाएं सहन करने की अच्छी क्षमता होती है. उत्तर भारत में ये फसलें मुख्यतः मार्च-अप्रैल में बोई जाती है.

तरबूज, ककडी, खीर आदि इस वर्ग गी प्रमुख फसलें हैं.

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